विज्ञान ने भी माने, ध्यान के अजब कारनामे

विज्ञान ने भी माने, ध्यान के अजब कारनामे

विज्ञान ने भी माने, ध्यान के अजब कारनामे

ध्यान क्या है? ओशो कहते हैं कि यह बस अपने मन के प्रति जागरूक होने की प्रक्रिया है। इसमें विचारों से कोई लड़ाई नहीं, यह बस उन्हें बिना किसी पूर्वग्रह के साक्षी भाव से देखने की प्रक्रिया है। वे कहते हैं ध्यान का अर्थ है अपने विचारों से पूर्णतया संबंध तोड़ना। फिर विचार जैसे-जैसे कम होने लगते हैं, बोध जागने लगता है। भीतर से जाग जाना ही ध्यान है।

बुद्ध कहते हैं, ” वह जिसका चित्त स्थिर है, वास्तविकता को उसके असली स्वरूप में देखता है।” ध्यान ही एकमात्र विद्या है जो आपके चित्त को स्थिर कर सकती है। यह मूर्छा को जागरूकता में रूपांतरित करने की प्रक्रिया है।

ध्यान के क्या फायदे है? जब मूर्छा टूटने लगती है, आप होशपूर्ण होने लगते हैं तो जीवन अपने बदलने लगता है। ध्यान की अवस्था में उतरने से पहले आप जैसा जीवन जी रहे थे, अब वैसा नहीं जी पाएंगे। क्योंकि मूर्छा टूट रही है, बोध जाग रहा है।

ध्यान करने वाला व्यक्ति कैसे अलग जीवन जीता है औऱ उसके फायदे क्या हैं? किसी ने भगवान बुद्ध से पूछा कि आपको ध्यान से क्या प्राप्त हुआ है। कहते हैं कि भगवान बुद्ध ने कहा, “कुछ नहीं लेकिन मैं आपको बताना चाहूंगा कि मैंने क्या खोया है : क्रोध, चिंता, अवसाद, ईर्ष्या, भय, असुरक्षा की भावना, वृद्धावस्था और मृत्यु का भय।” भगवान बुद्ध मानव मन के सबसे बड़े अन्वेषक हैं। वे कह सकते थे कि मुझे परम आनंद मिला, निर्वाण की प्राप्ति हुई, अब मैं समस्त कामनाओं से मुक्त हूं। लेकिन उन्होंने कहा कि उन्होंने क्रोध, चिंता, अवसाद, ईर्ष्या, भय, असुरक्षा की भावना से मुक्ति पा ली है।

भगवान बुद्ध के इस कथन की सत्यता आज विज्ञान भी प्रमाणित कर रहा है। कई तरह के शोध और अध्ययन किए गए और सभी में पाया गया कि ध्यान में आपके जीवन को रूपांतरित करने की अद्भुत शक्ति है।

ध्यान अपने आप से कराता है परिचित

ध्यान से ही आत्मसाक्षात्कार यानी आपकी स्वयं से मुलाकात संभव हो पाती है। जब आप होशपूर्ण होकर अपने विचारों को देखते हैं तभी आपको अपनी कमियों, खामियों के बारे में पता चलता है। ध्यान से हम जान पाते हैं कि हम कहां गलत कर रहे हैं? क्या गलत कर रहे हैं? हमारे आसपास के लोगों के साथ कैसे संबंध है? ये आपको विचारों को पहचानना सिखाता है। कह सकते हैं कि ध्यान हमें अपनी कमियों को सुधारने का मौका देता है और हम अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण की तरफ बढ़ने लगते है।

इस संबंध में कई अध्ययन किए गए हैं। इनकी समीक्षा करने से पता चलता है कि जिन लोगों ने ध्यान को एक उपचार पद्धति के रूप में अपनाया, उन पर इसने काफी प्रभावी रूप से काम किया। उनके अंदर अब नकारात्मक विचार नहीं थे। उनका अवसाद चला गया था। अब वे एक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीवन को आगे बढ़ा पा रहे थे। उनकी सोच अब पहले से कहीं अधिक सकारात्मक थी

 

तनाव दूर करने के लिए 

ध्यान लगाने से न केवल तनाव कम होता है बल्कि आप मानसिक और शारीरिक तौर पर भी स्वस्थ महसूस करते हैं। इस पर न्यूयॉर्क की बिग हैम्पटन यूनिवर्सिटी ने शोध किया है। इस शोध पत्र के अनुसार रोजाना केवल 10 मिनट का ध्यान करना भी आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। 

आमतौर पर मानसिक और शारीरिक तनाव के कारण स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है इससे तनाव के बहुत सारे प्रभाव हमारे शरीर पर दिखाई पड़ने लगते हैं। 

हमारे मूड को प्रभावित करने वाला रसायन साइटोकिन्स लोगों को गहरे अवसाद में लेकर जाने के लिए जिम्मेदार है इस पर भी कई अध्ययन किए गए जिसमें पाया गया कि ध्यान से इस रसायन पर काबू करने में खासी मदद मिली है।

ध्यान से ब्रेन में गामा क्रियाएं बढ़ जाती है और तनाव घटने के साथ ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है ब्रिटिश मेडिकल जनरल ने इसकी पुष्टि की है।

 

चिंता को करता है नियंत्रित

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के मनोवैज्ञानिक और हार्वर्ड एंड स्टैंडर्ड न्यूरोसाइंटिस्ट का मानना है की ध्यान से चिंता कम होती है। यह ब्रेन के ग्रे मटीरियल को पुनर्जीवित कर सीखने की क्षमता  और भावनाओं को सक्रिय करता है। इससे चिंता की स्थिति भी नियंत्रण में रहती है।

एक मेटा विश्लेषण में पाया गया कि ध्यान चिंता को कम कर सकता है। पुराने दर्द से जूझ रहे 47 लोगों पर एक अध्ययन किया गया था। आठ सप्ताह के ध्यान कार्यक्रम को पूरा करने के एक साल के भीतर इन लोगों में अवसाद, चिंता और दर्द में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

यह नौकरी से संबंधित चिंता को भी नियंत्रित करने में मदद करता है। इसलिए आज गूगल और नाइकी जैसी बड़ी बड़ी कंपनियों ने भी इसे अपनाया है। वे अपने कर्मचारियों के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित कराती है ताकि उनका तनाव कम हो सके और उनकी मानसिक सेहत दुरुस्त रहे। 

दरअसल ध्यान आपको साहस और अपने डर से अलग होने की क्षमता देता है और अपनी समस्या को जैसी है उसे स्वीकार करने की शक्ति देता है। 

 

याददाश्त को मजबूत बनाता है

उम्र बढ़ने के साथ साथ लोगों की याददाश्त कम होती जाती है। लेकिन रिसर्च के दौरान यह पाया गया कि जो उम्रदराज लोग हर रोज़ ध्यान लगाने का अभ्यास करते हैं उनका दिमाग बहुत सारी नई पुरानी बातों को भी आसानी से याद रख पाता है। ध्यान सोचने समझने की शक्ति को बढ़ाकर दिमाग को युवा रखने में मदद कर सकता है। 

न्यूरो साइकोलॉजिकल स्तर पर सुधार को लेकर लेकर कई अध्ययन किए गए। जिनसे पता चलता है कि ध्यान लगाने से याददाश्त तेज होती है और दिमाग पूरी तरह से सक्रिय बना रहता है।

एक अध्ययन न्यू यॉर्क संगठन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने भी किया था। उनका मानना है कि आठ सप्ताह तक नियमित रूप से ध्यान लगाने से दिमाग तेजी से सक्रिय होने लगता है और याददाश्त बढ़ने लगती है। यह अध्ययन जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित भी हुआ है।

दरअसल ध्यान लगाने से आपके दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ती है। आप बेहतर तरीके से सोच-समझ पाते हैं। मेडिटेशन आपके दिमाग में ग्रे मैटर वॉल्यूम बढ़ाकर ब्रेन सेल्स को स्वस्थ बनाने में मदद करता है।

 

नींद में सुधार 

लगभग आधी आबादी इस समय नींद की समस्या से जूझ रही है। माइंडफुलनेस मेडिटेशन के एक अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों ने ध्यान लगाया वे लंबे समय तक नींद लेने में सफल रहे हैं। ये आपके शरीर को आराम देने तनाव मुक्त करने और आपके चित्त को शांत करने में मदद कर सकता है। 

वैज्ञानिक शब्दों में ध्यान पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को प्रज्वलित करके और धीमी सांस को प्रोत्साहित करके हृदय गति को कम करने में मदद करता है जिससे रात में नींद की संभावना बढ़ जाती है यूं कहें कि हमें अच्छी नींद आती है।

 

हमें बनाता है सेहतमंद

ध्यान हमारी सेहत के लिए बहुत जरूरी है। ये दिल के दौरे, स्ट्रोक, रक्तचाप और अल्जाइमर के जोखिम को कम करता है। मधुमेह और अस्थमा जैसी बीमारियों से लड़ने में सहायक है। 

200 से अधिक महिलाओं और पुरुषों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार इससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा 48 प्रतिशत तक कम हो गया था। रक्तचाप के स्तर को सुधारने में भी मदद मिली और तनाव भी कम हुआ था।

दरअसल ध्यान करने से हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होने लगती है। क्योंकि जब दिमाग सही तरीके से काम करता है, तो शरीर के दूसरे कार्य भी सुधर जाते हैं। इसी का नतीजा है कि किसी भी तरह के संक्रमण से लड़ने की आपके शरीर की काबिलियत बढ़ जाती है। ध्यान से नेचुरल किलर सेल्स ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं जो शरीर में प्रवेश करने वाले बैक्टीरिया को नष्ट कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। 

 

कुछ और भी हैं फायदे

ध्यान आपके दिमाग को स्थिर व शांत करने में मदद करता है। इससे आपकी अस्वस्थ खानपान की आदतें धीरे धीरे खत्म होने लगती हैं।

आपका दिमाग भारी से भारी दर्द को सहने की क्षमता रखता है। ध्यान करने से आपका दिमाग कुछ हद तक मजबूत हो जाता है और आप दर्द से अपना ध्यान हटाने के काबिल बन जाते हैं। यह कुछ हद तक शारीरिक दर्द से राहत दिला सकता है।

 

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