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समय का खेल क्या हैं?

समय का खेल क्या हैं?

समय क्या हैं? समय वह हैं जिसे हमने खर्च कर दिया या समय वह हैं जिसे वर्तमान में आप खर्च कर रहे हैं। बुज़ुर्ग कहते हैं हमारा समय चला गया, हमारा समय तो ऐसा था, हम तो ऐसे थे और बहुत कुछ। लेकिन समय तो चक्र हैं जो कभी नहीं रुकता। तो कैसे आप कहते हैं की आपका समय चला गया।


मानते हैं हर काम का अपना एक स्पष्ट वक़्त होता हैं जिसे उसके सही समय पर पूर्ण हो जाना बेहतर होता हैं। लेकिन हर इंसान दूसरे इंसान से अलग होता हैं। जैसे – जरूरी नहीं की मेरे पिता अगर कारोबारी हैं तो मुझे भी कारोबारी ही होना चाहिए। मेरी अपनी पसंद हैं, जिसके हिसाब से ही में अपने व्यवसाय का चयन करूँगा।


हर समय की कहानी हैं। हर एक इंसान का समय अलग इरादा और परिणाम रखता हैं। यदि मेरी मित्र को ग्रैजुएट होने में 4 साल लगे तो वो उसके लिए सही समय था। हमारी भीतर यह क्षमता हैं की हम अपने दुःख के समय को भी उतने ही जोश से स्वीकार करे जैसे हम अपने ख़ुशी के समय को करते हैं। हर वक़्त आपको आपके नए स्वरूप से अवगत कराता हैं।


अपने शायद कभी ये गीत सुना होगा – जब समय का पहिया चलता हैं और रात आती हैं तो कहीं किसी और नुक्कड़ पर दीपक जलता हैं।


इस गीत का शीर्षक हैं – आपके बुरे और भले समय में कही-न-कही आपके अंतर मन में एक आशा का दीपक जलता हैं जिसका ज्ञान आप ध्यान की क्रिया में रह के करते हैं।
Sadhguru Sakshi Shree Ji कहते हैं आप अपनी ऊर्जा को सही जगह पर लगाएंगे तो आप अपने जीवन में कभी भी निराश नहीं होंगे।


जब हम सारा वक़्त एक ऐसे काम को पूरा करने में लगा देते हैं जिसे हमारा अवचेतन मन स्वीकार नहीं करता हैं तो वह काम हम पूरी ज़िंदगी पूरा नहीं कर पाते हैं। अपने समय और ऊर्जा का सही प्रयोग करने के लिए पहले आपको अपने चेतन और अवचेतन न से वाक़िफ़ होना होगा। जिस रोज़ आप इस ज्ञान को जान लेंगे  की आपका मन किस कार्य से खुश हैं तभी आप समय का खेल समझ पाएंगे। 


जब बालक इस दुनिया में जन्म लेता हैं तो वो हर चीज  को इस चेतना से देखता हैं मानो सब उसके लिए अजूबा हैं। उस समय वह बालक न दुःख और न सुख से अवगत होता हैं। वह केवल मिट्टी की तरह होता हैं जिसे धीरे-धीरे भावनाओं, उपेक्षा, प्रेरणा, मुस्कुराहट, दुख, दर्द, और बहुत सी चीजों से वाक़िफ़ करके हम एक रूप दे देते हैं। क्यों हम अपने आप को विश्वास करनेवाला बनाते हैं और अनुभवी नहीं? हमे अपनी औलाद से दुनिया को समझने का समय नहीं चुराना चाहिए। क्या हुआ अगर आपकी औलाद किसी चीज में असफल रही? असफलता का मतलब ये नहीं की आपका समय खत्म हो गया हैं, असफलता का मतलब हैं आपको और समय मिला हैं खुद को काबिल बनाने का।


हर इंसान अपने समय का चक्र लेकर जन्म लेता हैं। जैसे ही हम अपनी पहली श्वास लेते हैं समय का चक्र चलने लगता हैं। यह चक्र उस दिन रुकता हैं जब हमारा शरीर इस दुनिया से रुक्सत होता हैं। हमेशा यह मन में रखे की शरीर खत्म होता हैं, आत्मा नहीं। आपकी आत्मा हमेशा ब्रह्मांड में उपस्थित हैं और आपके रुक्सत होने के बाद आपको लोग किस रूप से जानेंगे यह आपके आचरण पर निर्भर होता हैं।


Science Divine में Sadhguru Sakshi Shree Ji ध्यान के मध्यम से हमे यह ज्ञान देते हैं की किस तरह से हम अपना समय और ऊर्जा सही दिशा में लगाए।
जिस रोज़ आपने मन पर संयम करने का ज्ञान सिख लिया तभी से आप समय के खेल को समझने लगेंगे। आपका बुरा और अच्छा समय आपके सोचने की कला पर निर्भर करता हैं। समय का चक्र वही चलता हैं जहा आपका मन उसे लेकर जाता हैं।


कल से 3० दिनों तक रोज सुबह उठ कर बिना अपनी आँखें खोले और किसी से बात करे। अपने बिस्तर पर बैठे-बैठे एक नकारात्मक और एक सकारात्मक बात सोचे जिसके होने का आपको एहसास हैं। 31 दिन या पहले ही वो दोनों सोच सचाई में तब्दील होंगी। उन दोनों खटनाओ का समय आपने ते किया हैं। जिस तरह से साइकिल का पहिया घूमता हैं वैसे ही आपके जीवन में हर तरह का समय आता हैं। कुछ आपके अपने मन की सोच हैं जो एक रूप लेती हैं और कुछ आपके भाग का खेल हैं।


समय का खेल, मन की इच्छा, चेतन मन और अवचेतन मन का भाव, दुःख-सुख का भोग, विफलता और सफलता – यह सबका ज्ञान केवल ध्यान हैं। कुछ समय अपने अंदर चल रहे हजारों सवालों का जवाब ढूढ़ने की क्रिया ही ध्यान हैं। जिसके माध्यम से आप समय और ऊर्जा दोनों का उपयोग सही दिशा में करने में समर्थक होंगे।

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