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जीवन क्या हैं? क्या फर्क हैं इंसान और पक्षियों में?

जीवन क्या हैं? क्या फर्क हैं इंसान और पक्षियों में?

पक्षी और इंसान में जन्म और मरण का फर्क हैं।   पक्षी ऊंची उड़ान उड़ता हैं, इंसान केवल ऊंची छलांग लगाता हैं।    इंसान के पास अपने मुताबिक नवीन प्रौद्योगिकी हैं। पक्षियों के पास अपने क्षेत्र में सफल होने के अपने विकल्प हैं।   दोनों अपने-अपने प्राणो, भोजन, जीवन, और परिवार के लिए परिश्रम करते हैं।   

हमे जीवन में क्या चाहते हैं – खाना-पीना, संतान, सुखी जीवन, और एक दिन दर्द रहित मौत।   यह वो सब इच्छा हैं जो संभव है इंसान और जानवर दोनों मांगते हैं। तो फिर क्या फर्क हैं इंसान और पक्षियों में।   दोनों पैदा होते हैं, अपना-अपना जीवन व्यतीत करते हैं और मृत्यु को अपना लेते हैं।   

हा, एक तरफ जहा एक जानवर के मरण पर कोई उसे याद करता होगा भी या नहीं, इसका हम इंसानों को कोई ज्ञान नहीं हैं।   लेकिन जब एक इंसान का शरीर खत्म होता हैं, तो उसको याद करके रोने वाले बेहद लोग होते हैं।   

सबसे पहला अंतर इंसान और पक्षियों में यह हैं की – इंसान एक सुखभोगी जीवन से विदा होता हैं।   एक ऐसा जीवन जिसके पीछे बेहद यादें छोड़कर जाता हैं। इंसान अपनी छवि अपने करीबियों के मन में छोड़कर जाता हैं।   वही एक जानवर या पक्षी की मृत्यु होती हैं तो केवल कुदरत उसे वाक़िफ़ होती हैं। हा, अगर वो जानवर पालतू हैं तो उसके मालिक को कुछ समय तक उसके ना होने का एहसास रहेगा लेकिन फिर  वह मालिक उस पक्षी की जगह कोई नया पक्षी ले आएगा।  

रोटी, कपड़ा और मकान – यह तीन चीजें हैं जिसके पीछे इंसान अपनी पूरी दुनिया निछावर रखता हैं उम्र भर।   जानवर भी इसके लिए ही तो रोज शिकार पर निकलता हैं। खाना, बालक पैदा करना और एक दिन मर जाना। यह कार्य हैं जिसके लिए दोनों जन्मे हैं।   लेकिन अगर जानवर यही सब काम इतने आराम से बिना किसी कष्ट के करने में सक्षम हैं तो फिर इंसान क्यों इसके लिए बेहद कष्ट झेलता हैं।  

इंसान और जानवर में एक अंतर यह हैं की – इंसान बंधन मुक्त हैं लेकिन जानवर संसाधन के लिए हमेशा से बंधा हुआ हैं।   आप एक इंसान होकर भी अपनी ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं और आपने पूरी ज़िंदगी लगा कर भी कुछ हासिल नहीं किया  तो आपने अपना जीवन नाश किया हैं।   

जो इंसान के रूप में भी कुछ हासिल नहीं कर पाया उसने मनुष्य की योनि में जन्म लेकर भी पक्षियों का जीवन व्यतीत किया हैं।   Sadhguru Sakshi Shree Ji कहते हैं मानव रूप में जन्मे हो तो आपके पास मौका हैं परम आनंद के अवस्था में रह कर, एक इंसान के रूप में जीवन को जीने का और अपना अगला जन्म इसी योनि में लेने का।   

परम आनंद का मतलब हैं – कभी बंग न होने वाला आनंद।   एक ऐसा जीवन जिसमे आप आज के साथ रहते हैं। कल के पीछे न भाग कर आप अपने आज को पूर्ण समय देते हैं।   भागने और भटकने वाला जीवन पक्षियों का होता हैं। इंसान अपनी आत्मा को विस्तृत करने के लिए जन्मा हैं।  

Sadhguru Sakshi Shree JI Science Divine में परम आनंद में जीवन को जीना सिखाते हैं।   इंसान के रूप में आना और जाना और फिर आना ये तो क्रिया हैं जिसके ज़रिए इंसान उस आत्मा से जुड़ता हैं जो इस पुरे संसार को चलाती हैं।   अपना जीवन व्यर्थ न करे, ख़ुशी आपके पास हैं, आपके उस पल में जिसे अभी आप जी रहे हैं। उस ख़ुशी से खुद को वंचित रख कर आप इंसान नहीं पक्षी की योनि को जी रहे हैं।    

इंसान का जीवन भटकने के लिए नहीं हैं वह जन्म हैं परम आनंद का जीवन व्यतीत करने के लिए।  

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