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केवल ऋणात्मक विचार इंसान को नहीं गलत बनाते हैं?

केवल ऋणात्मक विचार इंसान को नहीं गलत बनाते हैं?

सकारात्मक भावना केवल ईर्ष्या, निराशा, उदासी, क्रोध, भय, लज्जा, शोक और ग्लानि से नहीं जुड़ी होती हैं।  नकारात्मकता  हमारे मन में तब भी उत्पन्न होती हैं जब हम अपनी ख़ुशी के लिए किसी के साथ गलत करते हैं।  जब हम अपने आप का भला करने के लिए अनजाने में ही लेकिन किसी और का नुकसान कर देते हैं।  आपने अपने जीवन में ऐसे लोग देखे होंगे जो मानते हैं की अपना काम बनाओ चाहे दूसरे का बुरा हो जाये।  


मुझसे अक्सर लोग पूछते हैं की बुरे और अच्छे लोगो का चयन कैसे होता हैं।  क्या बुरा वो कहलाता हैं जो किसी का बुरा करता हैं या फिर वो जो गलत होता देख कर रोकता नहीं हैं। 


मेरा कहना हैं इंसान बुरा नहीं होता हैं उसके हालत और उस समय उसकी सोच उसे बुरा बना देती हैं।  यदि मेरे घर में मेरी माँ बीमार हैं और मेरे पास केवल कुछ ही पैसे हैं और तभी कोई गरीब बूढ़ा मेरे पास आकर मुझसे  पैसे मांगता हैं।  तो उस समय मेरे लिए क्या महत्वपूर्ण होगा, माँ की दवा या फिर उस बूढ़े बाबा की भूख को मिटाना।  यदि में अपनी माँ को चुनता हु तो शायद उस बूढ़े बाबा के दुःख का कारण बनुगा। वही दूसरी तरफ अगर में बूढ़े बाबा को चुनता हु तो मेरी माँ के प्रति मेरा फ़र्ज़ अधूरा रह जायेगा।  


यही नियम हैं दुनिया का हर वक़्त आप हर किसी को खुश या संतुष्ट नहीं कर सकते हैं। अगर  एक  काम किसी के लिए सही है तो यह जरुरी नहीं की वह किसी दूसरे के लिए भी सफल हो।  तो आप उन लोगो को संतुष्ट रखने का कार्य करे जो आपके दुःख के साथी बने हो क्योंकि सुख में करे हर कोई जो करे दुःख में आपका काम वही हैं साई राम।  


यदि कभी आपके मन में कोई ऐसा भाव उत्पन्न होता हैं जिस का आपको ज्ञान हैं की बुरा हैं तो उसे उत्पन्न होने  से पहले ही रोक दे।  आप सोच रहे होंगे की हमारा मन तो विचार से भरा टोकरा हैं उसे किस प्रकार साफ़ किया जाए।  जब भी आप कोई काम करे तो पहले उस काम से होने वाले नुकसान और फायदे की सूची तैयार करे।  इस सूची में वो सभी लोगो को शामिल करे जो आपके  काम से जुड़े हुए हैं।  जब आप अपने साथ किसी और का भी भला करते हैं तब आपके मन और प्रकृति को भी सुकून मिलता हैं।  


आज कल के समय में हम अपनी ज़िंदगी में इतने व्यस्त हैं की हमारे पास समय नहीं हैं अपने मन को ताज़ा बनाए  रखने का।  यही एक कारण हैं जिससे हमारे शरीर में कही तरह की गंभीर बीमारियाँ घर करने लगी हैं।  क्या आप इस बात से वाक़िफ़ हैं की कैंसर जैसे गंभीर रोग के रोगाणु हमारे शरीर में ही होते हैं।  जो भाग  हमारे शरीर का नाज़ुक होता हैं कैंसर के रोगाणु  वही अपना रंग दिखा देते हैं।  हमारे जीवन में आने वाला बुरा वक़्त और हमारे शरीर में हुआ रोग सबके पीछे हमारा अशांत मस्तिष्क ही कारण होता हैं।  जी हा, जिस तरह की सोच आपके मस्तिष्क में जन्म लेगी वैसे ही लोग, वक़्त, भला-बुरा और सब कुछ आपकी तरफ आकर्षित होगा।  हमारे मस्तिष्क का काम हैं हमारे शरीर को संकेत करना लेकिन जब हमारा मस्तिष्क ही स्वस्थ नहीं होगा तो वह हमारे शरीर को किस प्रकार सही संकेत देगा।  


मस्तिष्क ही सब काम करता हैं इसलिए बेहद आवश्यक हैं की आप इसे स्वस्थ बनाये रखे।  किसी भी तरह के सकारात्मक विचार अपने मस्तिष्क में पैदा ही नहीं होने दे।  


Scienec Divine से  जड़ कर आप Sadhguru Sakshi Shree Ji  से मन को साफ़ और नकारात्मक विचारों से लड़ने का ज्ञान प्राप्त करते हैं।  Guru Ji योग, विचार शक्ति और संजीवनी क्रिया के माध्यम से अपने जीवन में चल रही कठनाईयो से लड़ने के लिए अपने मस्तिष्क को शांत और स्वस्थ रखने के ज्ञान से वाक़िफ़ करवाते हैं।  


Science Divine में गुरु जी केवल ध्यान, योग और विचार शक्ति के ज़रिये हमे अपने मन को शांत और साफ़ करने की  कला से अवगत करवाते हैं।  वह नहीं कहते की आप सब कुछ त्याग कर सात्विक बन जाए।  गुरु जी केवल आज में रह कर अपने जीवन को आनंद के साथ जीने का ज्ञान देते हैं।   हम नहीं कहते की Science Divine से जुड़े , हम कहते हैं की हर मार्ग पर चलने का खुद को अवसर दे न जाने कब किस मार्ग से आपको शांति और सुकून का ज्ञान प्राप्त हो जाए।   

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